नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के एक हालिया संबोधन ने पड़ोसी देश पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। दिल्ली में युवाओं को संबोधित करते हुए डोभाल द्वारा ‘इतिहास के जुल्मों का बदला’ लेने की बात कहे जाने पर पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान की यह छटपटाहट कूटनीति से ज्यादा उसके ‘रणनीतिक डर’ को दर्शाती है।
क्या था डोभाल का वह बयान?
शनिवार को दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ में 3,000 युवा प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए 81 वर्षीय डोभाल ने भारत के अतीत और भविष्य पर बात की। उन्होंने कहा:
“‘बदला’ शब्द सुनने में शायद अच्छा न लगे, लेकिन यह राष्ट्रीय उत्कृष्टता (National Excellence) के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरक शक्ति बन सकता है। भारत को आर्थिक और सामाजिक रूप से इतना मजबूत बनना चाहिए कि वह फिर कभी उन हमलों और लूटपाट का शिकार न हो, जो उसके औपनिवेशिक अतीत का हिस्सा थे।”
डोभाल ने भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे नायकों का उदाहरण देते हुए युवाओं को प्रेरित किया कि वे देश को इतना ताकतवर बनाएं कि भारत अपनी सुरक्षा की शर्तें खुद तय कर सके।
पाकिस्तान की चिंता की असली वजह
CNN-News18 के अनुसार, भारत सरकार के उच्च अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान की बौखलाहट के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
- जीरो टॉलरेंस की नीति: भारत अब सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना चुका है। डोभाल के बयान को पाकिस्तान इसी संदर्भ में देख रहा है।
- आत्मनिर्भर भारत का डर: डोभाल का ‘बदला’ सैन्य आक्रामकता के बजाय ‘राष्ट्रीय मजबूती’ पर केंद्रित था। पाकिस्तान को डर है कि भारत की आर्थिक और रणनीतिक मजबूती उसे अंतरराष्ट्रीय पटल पर पूरी तरह अलग-थलग कर देगी।
सशक्त भारत: आक्रमण नहीं, आत्मनिर्भरता की पुकार
विशेषज्ञों का मानना है कि NSA डोभाल की बातों का मतलब यह था कि भारत को अपनी सैन्य और आर्थिक शक्ति को उस स्तर पर ले जाना चाहिए जहाँ कोई भी दुश्मन हमला करने की हिम्मत न कर सके। इसे किसी देश पर आक्रमण के बजाय ‘सुरक्षा और आत्मनिर्भरता’ की पुकार के रूप में देखा जा रहा है।
की-पॉइंट्स:
- संदर्भ: विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग, दिल्ली।
- NSA का विजन: इतिहास की गलतियों को दोहराने से बचने के लिए शक्ति संचय करना।
- भारत का रुख: सीमा पार आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं।
