नई दिल्ली/जम्मू: जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने के लिए केंद्र सरकार ने अपने शीर्ष अधिकारियों को मैदान में उतारा है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और खुफिया ब्यूरो (IB) के निदेशक तपन डेका बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंचे। यह दौरा आतंकवाद विरोधी अभियानों और सीमा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाई-लेवल मीटिंग: एजेंडे पर हैं घुसपैठ और ड्रोन चुनौतियां
जम्मू पहुंचते ही केंद्रीय अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल पुलिस मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में शामिल हुआ। इस बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- ड्रोन गतिविधियों पर लगाम: सीमा पार (पाकिस्तान) से ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए नई तकनीक और जवाबी कार्रवाई पर चर्चा।
- घुसपैठ रोधी ग्रिड (Anti-Infiltration Grid): सीमा सुरक्षा को और सख्त करने और घुसपैठ के संभावित रास्तों को पूरी तरह सील करने पर जोर।
- एजेंसी समन्वय: पुलिस, सेना और खुफिया एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और आपसी तालमेल को बेहतर बनाने की रणनीति।
पहाड़ी और वन क्षेत्रों पर विशेष फोकस
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा समीक्षा का मुख्य केंद्र जम्मू संभाग के वे जिले हैं जहाँ हाल के दिनों में आतंकी गतिविधियां देखी गई हैं। इनमें शामिल हैं:
- डोडा और किश्तवाड़: इन जिलों के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में छिपे आतंकियों को ट्रैक करना।
- कठुआ और उधमपुर: घने वन क्षेत्रों में चल रहे ‘सर्च एंड डिस्ट्रॉय’ ऑपरेशंस की प्रगति का जायजा लेना।
सुरक्षा बल इन इलाकों में आतंकवादियों को निष्क्रिय करने के लिए निरंतर अभियान चला रहे हैं और इस बैठक में इन अभियानों को और अधिक मारक बनाने पर सहमति बनी है।
रणनीतिक महत्व
वरिष्ठ अधिकारियों का यह दो दिवसीय दौरा दर्शाता है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर, विशेषकर जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद को पूरी तरह जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में मिले इनपुट्स के आधार पर आगामी सुरक्षा रणनीति में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।
की-हाइलाइट्स:
- प्रमुख अधिकारी: गृह सचिव गोविंद मोहन और IB चीफ तपन डेका।
- टारगेट एरिया: डोडा, किश्तवाड़, कठुआ और उधमपुर के पहाड़ी क्षेत्र।
- मुख्य चुनौती: सीमा पार से ड्रोन और घुसपैठ की कोशिशें।
