भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई सितारे आए और गए, लेकिन जो ‘क्रेज’ राजेश खन्ना (प्यार से ‘काका’) ने देखा, वह आज भी एक मिसाल है। 1960 के दशक के आखिर में एक ऐसा तूफान आया जिसने बॉलीवुड में नायक की परिभाषा ही बदल दी। राजेश खन्ना सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक घटना बन गए थे।
15 लगातार हिट्स: एक अटूट ऐतिहासिक रिकॉर्ड
राजेश खन्ना के नाम एक ऐसा कीर्तिमान दर्ज है जिसे आज के बड़े-बड़े सुपरस्टार्स भी नहीं छू पाए हैं। साल 1969 से 1971 के बीच उन्होंने लगातार 15 सोलो हिट फिल्में दी थीं। ‘अराधना’, ‘दो रास्ते’, ‘कटी पतंग’, ‘आनंद’ और ‘अमर प्रेम’ जैसी फिल्मों ने उन्हें सफलता के उस शिखर पर बैठा दिया जहाँ उनसे पहले कोई नहीं पहुँचा था। इसी दौर ने हिंदी सिनेमा को उसका पहला आधिकारिक ‘सुपरस्टार’ दिया।
लड़कियों में वो बेमिसाल दीवानगी
काका के लिए प्रशंसकों, खासकर महिला प्रशंसकों की दीवानगी की कहानियाँ आज भी फिल्मी गलियारों में मशहूर हैं। कहा जाता है कि:

- लड़कियाँ उनकी सफेद कार को चूमकर लिपस्टिक के निशान से लाल कर देती थीं।
- प्रशंसक उनकी कार की धूल से अपनी मांग भरती थीं।
- उन्हें खून से लिखे प्रेम पत्र मिलना एक आम बात थी।
उनके झुककर मुस्कुराने और गर्दन टेढ़ी करने के अंदाज़ पर पूरा देश फिदा था।
‘आनंद’ और “बाबूमोशाय” का जादू
राजेश खन्ना ने न केवल रोमांटिक फिल्में दीं, बल्कि ‘आनंद’ जैसी फिल्म के जरिए अभिनय की गहराई भी दिखाई। उनका संवाद— “बाबूमोशाय, जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं”—आज भी जीवन के प्रति एक बड़े दर्शन के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने पर्दे पर मौत को भी इतने खूबसूरत तरीके से जिया कि दर्शक सिनेमाघरों से रोते हुए निकलते थे।
एक युग जो सदाबहार बन गया
भले ही बाद में ‘एंग्री यंग मैन’ के रूप में अमिताभ बच्चन का उदय हुआ, लेकिन राजेश खन्ना का वो जादू आज भी फीका नहीं पड़ा है। उनका सिग्नेचर स्टाइल, गुरु शर्ट और वो दिलकश मुस्कान बॉलीवुड की सदाबहार यादों का एक अमूल्य हिस्सा है।
