बॉलीवुड की कालजयी फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ जितनी अपनी भव्यता के लिए जानी जाती है, उतनी ही यह फिल्म दिलीप कुमार और मधुबाला की असल जिंदगी की त्रासदी की भी गवाह रही है। शहजादा सलीम और अनारकली की यह प्रेम कहानी पर्दे पर तो अमर हो गई, लेकिन हकीकत में इन दो सितारों के रास्ते हमेशा के लिए जुदा हो गए।
9 साल का लंबा रिश्ता और एक कोर्ट केस
दिलीप कुमार और मधुबाला का प्यार करीब 9 साल तक चला। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। फिल्म ‘नया दौर’ की शूटिंग के दौरान लोकेशन बदलने को लेकर मधुबाला के पिता (अताउल्लाह खान) और निर्देशक बी.आर. चोपड़ा के बीच कानूनी विवाद हो गया। जब यह मामला कोर्ट पहुंचा, तो दिलीप कुमार ने निर्देशक के पक्ष में गवाही दी। यही वह मोड़ था जिसने इस खूबसूरत रिश्ते की नींव हिला दी और दोनों के बीच दरार पैदा कर दी।
बातचीत बंद, पर रोमांस जारी
‘मुगल-ए-आजम’ बनने में करीब 10 साल का समय लगा। फिल्म के अंतिम वर्षों की शूटिंग के दौरान हालत यह थी कि दिलीप कुमार और मधुबाला एक-दूसरे से बात तक नहीं करते थे। यहाँ तक कि एक-दूसरे को “नमस्ते” भी नहीं कहते थे।
सिनेमा का सबसे प्रतिष्ठित दृश्य: फिल्म का वह मशहूर सीन, जिसमें दिलीप कुमार ‘पंख’ (Feather) के जरिए मधुबाला के चेहरे को सहलाते हैं, उस समय शूट किया गया था जब दोनों के बीच घोर खामोशी और तनाव था। लेकिन उनकी अदाकारी की महानता देखिए कि पर्दे पर उनके बीच की केमिस्ट्री ने प्यार की नई परिभाषा लिख दी।
अधूरी हसरत का अंत
1960 में फिल्म रिलीज हुई और कल्ट क्लासिक बन गई, लेकिन तब तक दिलीप और मधुबाला पूरी तरह अलग हो चुके थे। मधुबाला ने बाद में किशोर कुमार से शादी कर ली, लेकिन दिल की बीमारी के चलते 36 साल की छोटी उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह दिया। दिलीप साहब ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में स्वीकार किया कि मधुबाला उनके जीवन की सबसे चुलबुली और जीवंत इंसान थीं।
