नई दिल्ली: भारतीय सेना खुद को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार कर रही है। सीमा पर बदलते खतरों को देखते हुए सेना में अब तक का सबसे बड़ा पुनर्गठन (Restructuring) जारी है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि पिछले 14-15 महीनों के भीतर सरकार ने सेना के संगठनात्मक बदलावों के लिए 31 सैंक्शन लेटर जारी किए हैं। इसमें इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBG) और खास ‘भैरव’ बटालियन का गठन सबसे प्रमुख है।
‘भैरव’ बटालियन: एक ही यूनिट में सब कुछ
सेना अब पारंपरिक ढांचे से हटकर 25 ‘भैरव’ लाइट कॉम्बैट बटालियन तैयार कर रही है, जिनमें से 13 बनकर तैयार हो चुकी हैं। यह सामान्य बटालियन से पूरी तरह अलग है क्योंकि इसमें मारक क्षमता और तकनीकी सपोर्ट का जबरदस्त कॉम्बिनेशन है:
एकीकृत ताकत: इसमें इन्फेंट्री (पैदल सेना) के साथ-साथ आर्टिलरी (तोपखाना), एयर डिफेंस और सिग्नल्स के सैनिक एक साथ होंगे।
आधुनिक हथियार: इन बटालियनों के पास खुद के ड्रोन, लॉइटरिंग एम्युनिशन (आत्मघाती ड्रोन) और एंटी-एयरक्राफ्ट गन होंगी।
स्पेशल ट्रेनिंग: भैरव बटालियन के सैनिक एयरबॉर्न (आसमान से कूदने) से लेकर अंडरवाटर (पानी के भीतर) ऑपरेशंस तक में माहिर होंगे।
मिशन: इनका मुख्य काम दुश्मन की सीमा के पार जाकर जानकारी जुटाना, उनकी गतिविधियों को रोकना और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ऑपरेशंस को अंजाम देना है।
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBG) और एविएशन ब्रिगेड
सेना के भीतर अलग-अलग शाखाओं (आर्म्स) के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए बड़े फैसले लिए गए हैं:
IBG का गठन: अब सेना युद्ध के मैदान में अपनी पूरी ब्रिगेड को एक साथ मूव करने के बजाय छोटे और घातक ‘इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स’ के जरिए हमला करेगी, जो ज्यादा तेज और प्रभावी होंगे।
एविएशन ब्रिगेड: सेना की अपनी हवाई ताकत बढ़ाने के लिए एविएशन ब्रिगेड बनाई जा रही हैं, जिससे टैंकों और पैदल सेना को तुरंत हवाई कवर मिल सके।
थिएटर कमांड की ओर कदम: तीनों सेनाओं (थल, नभ और जल) के बीच ‘जॉइंटनेस’ यानी एकीकरण पर तेजी से काम हो रहा है।
रूद्र और शक्तिबाण: सेना का नया सुरक्षा कवच
भारतीय सेना अपनी आक्रामक क्षमता के साथ-साथ रक्षा प्रणाली को भी मजबूत कर रही है। रूद्रा और शक्तिबाण जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए आर्टिलरी और मिसाइल डिफेंस को आधुनिक बनाया जा रहा है, ताकि दुश्मन की किसी भी मिसाइल या ड्रोन हमले को हवा में ही ध्वस्त किया जा सके।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी के नेतृत्व में हो रहे ये बदलाव बताते हैं कि भारतीय सेना अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से आधुनिक और आक्रामक ‘फ्यूचर रेडी फोर्स’ बनने की दिशा में है।
