AI और जर्मन तकनीक संभालेगी करोड़ों की भीड़

उज्जैन | मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को लेकर मोहन यादव सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। इस बार सिंहस्थ केवल परंपराओं का संगम नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक का अनूठा उदाहरण भी बनेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को “सुरक्षा कवच” के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
प्रमुख विशेषताएं: तकनीक के जरिए सुरक्षा
- AI आधारित स्मार्ट कैमरा नेटवर्क: पूरे मेला क्षेत्र में हजारों हाई-डेफिनिशन AI कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे न केवल भीड़ की गिनती करेंगे, बल्कि यह भी भांप लेंगे कि किस गली या घाट पर भीड़ का दबाव ‘खतरे के निशान’ से ऊपर जा रहा है।
- प्रेडिक्टिव एनालिसिस (पूर्वानुमान): डेटा के आधार पर सिस्टम पुलिस को 30 मिनट पहले ही चेतावनी दे देगा कि किसी विशेष मार्ग पर भीड़ बढ़ सकती है, जिससे भगदड़ जैसी स्थितियों को रोका जा सकेगा।
- जर्मन तकनीक का साथ: हाल ही में जर्मनी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने उज्जैन का दौरा किया है। जर्मनी में फुटबॉल मैचों के दौरान इस्तेमाल होने वाली भीड़ प्रबंधन तकनीक और कचरा प्रबंधन (Waste Management) सिस्टम को सिंहस्थ में लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
- सेंट्रल कंट्रोल रूम: एक हाई-टेक कमांड सेंटर बनाया जाएगा जहाँ से पूरे मेले की 24×7 लाइव मॉनिटरिंग होगी। ड्रोन कैमरों के जरिए आसमान से भी चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जाएगी।
सुरक्षा पर ₹2500 करोड़ का निवेश
रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंहस्थ 2028 की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी बुनियादी ढांचे पर सरकार लगभग 2500 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है। इसमें संदिग्ध चेहरों की पहचान के लिए ‘फेस रिकग्निशन’ और ‘स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नलिंग’ जैसे फीचर्स शामिल होंगे।
प्रशासन का लक्ष्य: “जीरो पैनिक जोन”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार, इस बार का लक्ष्य श्रद्धालुओं के लिए “सुगम और सुरक्षित” अनुभव प्रदान करना है। तकनीक का उपयोग इस तरह किया जाएगा कि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के शिप्रा नदी में पुण्य स्नान कर सकें।
विशेष: इस बार प्रशासन ग्रीन कॉरिडोर और ई-बसों पर भी जोर दे रहा है ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना परिवहन व्यवस्था सुचारू रहे।
