उज्जैन: आर्मेनिया में आयोजित वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली उज्जैन की होनहार पहलवान प्रियांशी प्रजापत आखिरकार सुरक्षित भारत लौट आई हैं। मध्य-पूर्व में जारी युद्ध और दुबई में मिसाइल हमलों के कारण पैदा हुए संकट की वजह से प्रियांशी पिछले चार दिनों से वहां फंसी हुई थीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के व्यक्तिगत हस्तक्षेप और रणनीतिक प्रयासों के बाद उनकी घर वापसी संभव हो सकी है।
संकट और संघर्ष की कहानी
- उड़ानें रद्द होने से फंसीं: प्रियांशी को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 मार्च को दुबई के रास्ते भारत आना था। हालांकि, युद्ध के बिगड़ते हालात और दुबई में मिसाइल गिरने की खबरों के बाद उड़ानें रद्द कर दी गईं।
- मदद की गुहार: प्रदेश की एकमात्र खिलाड़ी होने के नाते जब प्रियांशी के फंसने की खबर मिली, तो उनके पिता मुकेश प्रजापत ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष नारायण यादव के माध्यम से मुख्यमंत्री से मदद मांगी।
- सीएम का सीधा संवाद: मुख्यमंत्री ने न केवल प्रियांशी से ऑनलाइन बात कर उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि उनकी वापसी का सुरक्षित रास्ता भी तैयार करवाया।
नया रूट और सुरक्षित लैंडिंग
युद्ध क्षेत्र से बचाने के लिए प्रियांशी को आर्मेनिया से तुर्की और फिर कजाकिस्तान के रास्ते भारत लाने की व्यवस्था की गई। गुरुवार सुबह जैसे ही प्रियांशी ने भारतीय सरजमीं पर कदम रखा, उनके परिवार और खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ गई।
प्रियांशी का शानदार सफर
संकट में फंसने से पहले प्रियांशी ने खेल के मैदान पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया:
- उन्होंने कजाकिस्तान, अमेरिका और आर्मेनिया की पहलवानों को हराकर रजत पदक (Silver Medal) जीता।
- वे इससे पहले एशियन सीरीज में स्वर्ण पदक भी जीत चुकी हैं।
खिलाड़ी बेटी को हमेशा मिला यादव का साथ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रियांशी के करियर में शुरू से ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जब वे मध्य प्रदेश कुश्ती क्षेत्र के अध्यक्ष थे, तब भी उन्होंने प्रियांशी को आर्थिक सहायता प्रदान की थी। उन्होंने हमेशा प्रियांशी को अपनी बेटी के समान स्नेह और समर्थन दिया है, जिससे एक साधारण परिवार की इस खिलाड़ी ने वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई।
