IIT इंजीनियर से IAS तक: अनन्या दास की सफलता की कहानी, जिन्होंने पहले ही प्रयास में हासिल की 16वीं रैंक
भुवनेश्वर/कटक: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है, लेकिन कुछ लोग अपने दृढ़ निश्चय से इसे पहले ही प्रयास में फतह कर लेते हैं। ऐसी ही एक कहानी है ओडिशा कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी अनन्या दास की।
IIT मद्रास से सिविल सेवा का सफर
पश्चिम बंगाल में 15 मई 1992 को जन्मी अनन्या बचपन से ही मेधावी छात्रा रही हैं। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने BITS पिलानी से इकोनॉमिक्स में एमएससी (MSc) भी किया।
आईएएस बनने से पहले अनन्या ने बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘ओरेकल’ (Oracle) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया और जयपुर में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में बतौर एग्जीक्यूटिव इंटर्न भी सेवाएं दीं। हालांकि, उनका लक्ष्य समाज के लिए जमीनी स्तर पर काम करना था, जिसके चलते उन्होंने मोटी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं।
पहले प्रयास में रचा इतिहास
अनन्या की मेहनत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने साल 2015 की यूपीएससी परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 16वीं रैंक हासिल की। वह अपने बैच की स्टेट टॉपर भी रहीं।
निजी जीवन और संघर्ष
अनन्या दास का जीवन केवल सफलताओं के लिए ही नहीं, बल्कि मुश्किल समय में खुद को संभालने के लिए भी जाना जाता है। उनकी तुलना अक्सर चर्चित आईएएस टीना डाबी से की जाती है, क्योंकि दोनों ने ही अपने जीवन में उतार-चढ़ाव देखे हैं।
- अनन्या की पहली शादी आईएएस मोहम्मद अब्दाल अख्तर से हुई थी, लेकिन किन्हीं कारणों से यह रिश्ता टिक नहीं पाया और दोनों का तलाक हो गया।
- इसके बाद, 2023 में अनन्या ने 2014 बैच के आईएएस अधिकारी चंचल राणा से दूसरी शादी की, जो खुद यूपीएससी में 7वीं रैंक हासिल कर चुके हैं।
वर्तमान जिम्मेदारी
शुरुआत में अनन्या को गुजरात कैडर मिला था, लेकिन शादी के बाद वह ओडिशा कैडर में आ गईं। वह कटक नगर निगम की कमिश्नर और संबलपुर की जिलाधिकारी (DM) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं। वर्तमान में (फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार), वह ओडिशा स्कूल शिक्षा कार्यक्रम प्राधिकरण (OSEPA) में स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद पर तैनात होकर शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए काम कर रही हैं।
“अनन्या की कहानी हमें सिखाती है कि करियर में बदलाव का साहस और व्यक्तिगत कठिनाइयों से उबरने का जज्बा ही इंसान को असली पहचान दिलाता है।”
