नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने देश की प्रमुख आतंकवाद-रोधी एजेंसी, नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राकेश अग्रवाल को NIA का नया महानिदेशक (DG) नियुक्त किया गया है। वे निवर्तमान महानिदेशक का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल इस महीने समाप्त हो रहा है।
कौन हैं राकेश अग्रवाल? (प्रोफाइल)
राकेश अग्रवाल भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 1991 बैच के अधिकारी हैं। अपनी ईमानदारी, सख्त कार्यशैली और जटिल मामलों को सुलझाने की क्षमता के लिए जाने जाने वाले अग्रवाल के पास सुरक्षा और जांच का व्यापक अनुभव है।
- अनुभव: NIA प्रमुख बनने से पहले वे गृह मंत्रालय और राज्य पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
- विशेषज्ञता: उन्हें साइबर अपराध, टेरर फंडिंग (आतंकवाद को मिलने वाली फंडिंग) और आंतरिक सुरक्षा के मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है।
NIA प्रमुख के रूप में उनके सामने 5 बड़ी चुनौतियां
राकेश अग्रवाल की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत को कई फ्रंट पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके एजेंडे में ये 5 बिंदु सबसे ऊपर रहेंगे:
- टेरर फंडिंग पर नकेल: कश्मीर और पंजाब में सक्रिय उग्रवादी गुटों को विदेशों से मिलने वाली फंडिंग के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना।
- साइबर टेररिज्म: डिजिटल युग में बढ़ रहे साइबर हमलों और ऑनलाइन भर्ती (Online Recruitment) के माध्यम से फैल रहे कट्टरपंथ को रोकना।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: इंटरपोल और अन्य विदेशी जांच एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाकर फरार अपराधियों और आतंकवादियों को वापस भारत लाना।
- नार्को-टेररिज्म: सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी, जिसका इस्तेमाल आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए किया जाता है, उस पर लगाम लगाना।
- जांच में तेजी: NIA के पास लंबित हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच को तेजी से पूरा कर दोषियों को सजा दिलाना।
NIA के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी
- स्थापना: 2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के बाद 2009 में इसकी स्थापना की गई थी।
- मुख्यालय: नई दिल्ली।
- कार्य: यह एजेंसी बिना राज्य सरकार की अनुमति के देश के किसी भी हिस्से में आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच करने का अधिकार रखती है।
संपादकीय टिप्पणी:
राकेश अग्रवाल की नियुक्ति यह स्पष्ट संकेत देती है कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाना चाहती है। उनके अनुभव का लाभ निश्चित रूप से देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने में मिलेगा।
