अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़े मानहानि मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने पार्टी नेता संजय सिंह से अलग ट्रायल (सुनवाई) चलाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट का फैसला
जस्टिस एमआर मेंगदे ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए केजरीवाल की याचिका को अस्वीकार कर दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पिछले महीने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश की प्रति अभी सार्वजनिक होना बाकी है।
केजरीवाल ने क्या दलील दी थी?
अरविंद केजरीवाल ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि उनका और संजय सिंह का मामला पूरी तरह अलग है। उनकी मुख्य दलीलें इस प्रकार थीं:
- दोनों नेताओं के खिलाफ आरोप अलग-अलग घटनाओं से संबंधित हैं।
- दोनों ने अलग-अलग तारीखों पर बयान दिए और अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए।
- केजरीवाल का दावा था कि उन पर साजिश रचने या किसी आपराधिक इरादे को बढ़ावा देने का कोई आरोप नहीं है, इसलिए एक साथ ट्रायल चलाना न्यायसंगत नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद अप्रैल 2023 में तब शुरू हुआ जब गुजरात यूनिवर्सिटी ने अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया।
यूनिवर्सिटी के मुख्य आरोप:
- छवि खराब करना: यूनिवर्सिटी का कहना है कि दोनों नेताओं ने संस्थान की प्रतिष्ठा पर झूठे सवाल उठाकर उसकी साख को नुकसान पहुँचाया है।
- तथ्यों को छिपाना: शिकायतकर्ता के वकील अमित नायर के अनुसार, पीएम मोदी की डिग्री पहले ही आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जा चुकी है। इसके बावजूद नेताओं ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी सच छिपा रही है।
- संस्थान की गरिमा: यूनिवर्सिटी ने कोर्ट को बताया कि संस्थान 70 साल से भी अधिक पुराना है और इसकी जनता के बीच गहरी साख है। इन बयानों से जनता के मन में संस्थान के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश की गई।
बड़ी बात: अब निचली अदालत में अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह दोनों के खिलाफ एक साथ मानहानि का मामला चलता रहेगा।
