बड़ी बातें:
- घोषणा: भारतीयों को जर्मनी में मिला वीजा-फ्री ट्रांजिट।
- त्रिपक्षीय सहयोग: अफ्रीका के विकास के लिए भारत-जर्मनी साथ।
- सांस्कृतिक गौरव: टैगोर और मैडम कामा के योगदान को दी गई श्रद्धांजलि।
अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच हुई शिखर वार्ता ने भारत-जर्मनी संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुँचा दिया है। सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक साझेदारी में बदलने का विजन पेश किया। इस दौरान भारतीयों के लिए जर्मनी में ‘वीजा-फ्री ट्रांजिट’ की बड़ी घोषणा भी की गई।

ऐतिहासिक जुड़ाव और आधुनिक साझेदारी
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत और जर्मनी के बीच सदियों पुराने बौद्धिक और सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा:
- रवींद्रनाथ टैगोर: उनकी रचनाओं ने जर्मनी की बौद्धिक दुनिया को नया नजरिया दिया।
- स्वामी विवेकानंद: उनके दर्शन ने पूरे यूरोप को प्रेरित किया।
- मैडम भीखाजी कामा: उन्होंने पहली बार जर्मनी की धरती पर भारत की आजादी का झंडा फहराकर वैश्विक पहचान दिलाई थी।
प्रमुख घोषणाएं और समझौते (MoUs)
- वीजा-फ्री ट्रांजिट: पीएम मोदी ने भारतीय नागरिकों के लिए जर्मनी में ‘वीजा-फ्री ट्रांजिट’ की सुविधा देने के लिए चांसलर मर्ज का आभार जताया। इससे यात्रा सुगम होगी और व्यापारिक व व्यक्तिगत संबंध मजबूत होंगे।
- मैरीटाइम हेरिटेज सहयोग: गुजरात के लोथल में बन रहे ‘नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स’ के साथ जर्मन मैरीटाइम म्यूजियम सहयोग करेगा।
- पारंपरिक चिकित्सा: गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी और जर्मनी के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) साइन किया गया है।
- त्रिपक्षीय विकास साझेदारी: भारत और जर्मनी मिलकर घाना, कैमरून और मलावी जैसे देशों में संयुक्त प्रोजेक्ट्स चला रहे हैं, जो दुनिया के लिए एक सफल मॉडल है।
चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का गर्मजोशी भरा स्वागत
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भारत में मिले शानदार स्वागत की सराहना की। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत और जर्मनी का साथ केवल दो देशों के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
लोथल और आयुर्वेद: गुजरात कनेक्शन
पीएम मोदी ने विशेष रूप से गुजरात के लोथल और आयुर्वेद यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे जर्मनी और भारत का यह सहयोग समुद्री इतिहास और प्राचीन चिकित्सा पद्धति को आधुनिक युग से जोड़ रहा है।
