वॉशिंगटन/डेट्रॉइट: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ऊर्जा और सुरक्षा नीति को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। डेट्रॉइट इकनॉमिक क्लब में दिए गए अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला के साथ किए गए समझौतों और हालिया कार्रवाई की बदौलत अमेरिका में ईंधन (Fuel) की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की जा रही है।
50 मिलियन बैरल तेल की डील: क्या है पूरा मामला?
ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर अपनी रणनीति को पूरी तरह सफल बताते हुए कहा कि अमेरिका ने वहां से भारी मात्रा में तेल मंगाना शुरू कर दिया है।
- डील की मात्रा: लगभग 50 मिलियन बैरल कच्चा तेल।
- लागत: करीब 5 बिलियन डॉलर।
- शिपमेंट: इसे अमेरिका लाने के लिए दुनिया के 50 सबसे बड़े ‘मेगा जहाजों’ की जरूरत है, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 10 लाख बैरल तेल ले जाने की है।
ट्रंप ने बताया कि इस तेल को अमेरिका में रिफाइन किया जा रहा है, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल और गैसोलीन की सप्लाई तेजी से बढ़ी है।
महंगाई पर प्रहार: डोनट्स के उदाहरण से समझाया गणित
राष्ट्रपति ट्रंप ने तर्क दिया कि तेल की कीमतें कम होने का सीधा असर आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने कहा:
“जब गैसोलीन 1.99 डॉलर प्रति गैलन हो जाता है, तो सब कुछ सस्ता होने लगता है। डोनट्स की कीमतें गिरती हैं क्योंकि उन्हें पहुंचाने वाले ट्रक की लागत कम हो जाती है।”
ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका के कई राज्यों में पेट्रोल के दाम $2.50 से नीचे और कुछ जगहों पर तो $2 प्रति गैलन से भी कम हो गए हैं।
वेनेजुएला नीति में यू-टर्न: “अब हम उनके समर्थक हैं”
भाषण का सबसे दिलचस्प हिस्सा वेनेजुएला के साथ संबंधों में आया बदलाव था। ट्रंप ने कहा कि वह अब वेनेजुएला के साथ मिलकर काम करने और उस देश को फिर से मजबूत बनाने के पक्ष में हैं। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पुरानी नीतियों ने अमेरिका को नुकसान पहुंचाया, जबकि उनकी सरकार ने ‘सफल एक्शन’ लेकर हालात बदल दिए हैं।
उन्होंने पुरानी नाराजगी का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि वेनेजुएला द्वारा अपनी जेलें खाली कर अपराधियों को अमेरिका भेजने की वजह से संबंध खराब हुए थे, लेकिन अब वे सहयोग की दिशा में बढ़ रहे हैं।
ग्लोबल ऑयल मार्केट पर असर
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। लंबे समय से प्रतिबंधों और खराब ढांचे के कारण वहां का उत्पादन ठप था। ट्रंप की इस नई नीति और भारी खरीद से न केवल अमेरिका में महंगाई कम होगी, बल्कि वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) के समीकरण भी बदल सकते हैं।
