इंटरनेशनल डेस्क: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के हिंसक दमन और प्रदर्शनकारियों की हत्याओं के बढ़ते मामलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव पैदा कर दिया है। बिगड़ते हालातों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई है। इस कदम का वैश्विक नेताओं ने स्वागत किया है और ईरान के शासन पर दबाव बढ़ा दिया है।
इज़राइल का समर्थन: “आज़ादी की लड़ाई दमन से बड़ी है”
संयुक्त राष्ट्र में इज़राइल के राजदूत डैनी डैनन ने सुरक्षा परिषद की आपात बहस का जोरदार स्वागत किया। अयातुल्ला शासन की आलोचना करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर कहा:
“एक तरफ शासन निर्दोष प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला रहा है और फांसी दे रहा है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया धीमी रही है। ईरानी जनता को यह जानना चाहिए कि वे अकेले नहीं हैं। आपकी आज़ादी की लड़ाई किसी भी दमनकारी सत्ता से कहीं अधिक मजबूत है।”
यूरोपीय देशों ने दिखाए सख्त तेवर
ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब कार्रवाई की तैयारी भी दिख रही है:
- अतिरिक्त प्रतिबंधों की आहट: यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कलास ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने संकेत दिए कि यूरोपीय संघ ईरान पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
- राजनयिक दबाव: फिनलैंड ने ईरानी राजनयिक (चार्ज द’अफेयर्स) को तलब कर सख्त लहजे में अपनी मांगें रखी हैं। फिनलैंड ने हिंसा को तुरंत रोकने, प्रदर्शनकारियों की रिहाई और देश में इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने की मांग की है।
प्रमुख बिंदु: क्यों बढ़ रहा है विवाद?
- मानवाधिकारों का हनन: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों द्वारा घातक हथियारों का प्रयोग।
- फांसी की सजा: विरोधियों की आवाज दबाने के लिए मौत की सजा का सहारा लेना।
- सूचना पर पाबंदी: ईरान सरकार द्वारा इंटरनेट बंद करना ताकि दुनिया को वहां की वास्तविकता का पता न चल सके।
