जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी के जन्म कल्याणक के शुभ अवसर पर आगामी 11 मार्च 2026, बुधवार (चैत्र विदी अष्टमी) से वर्षीतप की कठिन और फलदायी आराधना का प्रारंभ होने जा रहा है।
अणु जन्म शताब्दी वर्ष-2032: श्री धर्मदास गण परिषद द्वारा 11 मार्च से ‘वर्षीतप आराधना’ का भव्य शुभारंभ
रतलाम/मंदसौर। आध्यात्मिक चेतना और आत्म-शुद्धि के पावन मार्ग पर अग्रसर होते हुए श्री धर्मदास गण परिषद द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए ‘वर्षीतप आराधना’ का शंखनाद किया गया है। अणु जन्म शताब्दी वर्ष-2032 के उपलक्ष्य में आयोजित नौ वर्षीय आराधना के इस तृतीय वर्ष (2026-27) में सम्पूर्ण धर्मदास गण में एक साथ सामूहिक आराधना का शुभारंभ होगा।
प्रमुख तिथियाँ और संकल्प
परिषद द्वारा जारी अधिकृत सूचना के अनुसार, आराधना का कार्यक्रम इस प्रकार निर्धारित किया गया है:
- शुभारंभ दिवस: 11 मार्च 2026, बुधवार (भगवान श्री आदिनाथ जी का जन्म कल्याणक दिवस)।
- समाप्ति (पारणा) दिवस: अक्षय तृतीया 2027।
तप के विविध विकल्प
श्रावक-श्राविकाओं से विनम्र निवेदन किया गया है कि वे अपनी शारीरिक अनुकूलता और श्रद्धा के अनुसार निम्नलिखित में से किसी भी पद्धति से वर्षीतप का संकल्प लें:
- उपवास से वर्षीतप।
- आयंबिल से वर्षीतप।
- एकासन से वर्षीतप।
- नीवीं से वर्षीतप।
जिन श्रावकों की आराधना पूर्व से चल रही है, वे उसे निरंतर आगे बढ़ाएंगे।
विशेष मार्गदर्शन एवं आत्म-आलोचना
धर्मदास गणनायक, प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री जिनेन्द्रमुनि जी म.सा. के पावन सानिध्य में अक्षय तृतीया 2027 के अवसर पर सभी तपस्वी अपने तप में लगे दोषों की आलोचना कर प्रायश्चित ग्रहण करेंगे।
संपर्क सूत्र
इस पुनीत कार्य में सम्मिलित होने और अधिक जानकारी हेतु परिषद के पदाधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है:
- भरत भंसाली: 94068 50428
- शैलेष पीपाड़ा: 94251 95131
- विनोद धोका: 94279 30784
निवेदक: श्री धर्मदास जैन श्री संघ व संघ की समस्त संस्थाएं, रतलाम कार्यालय: श्री धर्मदास गण परिषद, भंसाली ज्वेलर्स, मेन रोड, मंदसौर (म.प्र.)
