थांदला (झाबुआ) | श्री धर्मदास गण परिषद के तत्वाधान में आगामी 11 मार्च 2026 से ‘वर्षीतप’ की पावन आराधना का भव्य शुभारंभ होने जा रहा है। यह आयोजन पूज्य श्री जिनेंद्रमुनि जी म.सा. के पावन आशीर्वाद और आचार्य प्रवर श्री उमेशमुनि जी म.सा. ‘अणु’ की प्रेरणा से आयोजित किया जा रहा है।
इतिहास और महत्व
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए 400 दिनों तक निराहार रहकर जिस कठिन तपस्या का मार्ग दिखाया था, उसी की स्मृति में ‘वर्षीतप’ किया जाता है। परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि यह तप त्याग और संयम का प्रतीक है।
नगर में विशेष उत्साह
थांदला नगर में इस वर्ष विशेष उत्साह देखा जा रहा है:
आराधकों की संख्या: लगभग 108 आराधक एक साथ इस कठिन तपस्या का संकल्प लेंगे।
सामूहिक पारणा: श्री संघ द्वारा स्थानीय महावीर भवन में सभी तपस्वियों के लिए सामूहिक पारणे (भोजन) की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
सहयोग: तप की अनुमोदना हेतु ₹15,000 प्रति पारणा के मान से दानदाता अपना सहयोग दर्ज करा सकते हैं।
सर्व समाज की सहभागिता
परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत भंसाली और महामंत्री शैलेश पीपाड़ा ने जानकारी दी कि इस वर्ष इस आराधना में न केवल धर्मदास गण, बल्कि स्थानकवासी, मूर्तिपूजक, तेरापंथ और दिगंबर जैन समाज के तपस्वी भी एकजुट होकर शामिल होंगे।
मुख्य तिथियाँ
प्रारंभ: 11 मार्च 2026
समापन (पारण): आगामी वर्ष की अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) पर।
मीडिया प्रभारी पवन नाहर के अनुसार, इस आयोजन को लेकर सकल जैन समाज में भारी हर्ष का माहौल है और व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।
