जनसुनवाई में अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करने की प्रभावी व्यवस्था की मांग
रतलाम। निजी शिक्षण संस्थाओं की मनमानी पर रोक लगाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की रतलाम इकाई ने प्रांतीय उपाध्यक्ष अनुराग लोखंडे के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पंचायत ने स्कूलों द्वारा पुस्तकों, यूनिफॉर्म एवं विभिन्न शुल्कों के माध्यम से अभिभावकों पर प्रतिवर्ष डाले जाने वाले अनावश्यक आर्थिक भार पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को अवगत कराया कि सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र एवं मध्यप्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है, इसके बावजूद निजी स्कूलों द्वारा हर वर्ष अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जाता है। वर्तमान में प्रवेश प्रक्रिया जारी होने के मद्देनजर तत्काल ठोस व्यवस्था एवं निगरानी तंत्र विकसित किए जाने की आवश्यकता बताई गई, ताकि स्कूल प्रबंधन किसी भी प्रकार से अभिभावकों को अनावश्यक खर्च वहन करने के लिए बाध्य न कर सकें।
ग्राहक पंचायत ने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन की ओर से अभिभावकों और प्रशासन की संयुक्त टीम गठित की जाए, जो प्रवेश प्रक्रिया के दौरान आकस्मिक निरीक्षण कर सके। इस टीम में उपभोक्ता हितों के संरक्षण के लिए कार्यरत संगठनों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, जिससे कार्रवाई निष्पक्ष एवं प्रभावी हो सके। टीम की रिपोर्ट पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।
प्रतिनिधिमंडल में अनुराग लोखंडे के साथ महेंद्र भंडारी, सत्येंद्र जोशी, श्याम ललवानी, नरेश सकलेचा, संजीव राव एवं जिला प्रचार प्रमुख नीरज कुमार शुक्ला सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इन प्रमुख बिंदुओं पर दिलाया ध्यान
🔹 एनसीईआरटी से इतर महंगी पुस्तकें अनिवार्य
स्कूलों द्वारा एनसीईआरटी के निर्धारित पाठ्यक्रम के अतिरिक्त निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें अनिवार्य कर दी जाती हैं। इनमें रिक्त स्थान अधिक होने से विद्यार्थियों को पुस्तक में ही उत्तर भरने होते हैं, जिससे उनका पुनः उपयोग संभव नहीं होता। परिणामस्वरूप हर वर्ष नई पुस्तकें खरीदना अनिवार्य हो जाता है।
🔹 अनावश्यक रूप से पुस्तकें बदलना
अधिकांश स्कूल प्रतिवर्ष एक-दो पुस्तकें बदल देते हैं, जिससे अभिभावकों को नई पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य होना पड़ता है। जब तक पाठ्यक्रम में वास्तविक परिवर्तन न हो, तब तक पुस्तकों में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
🔹 यूनिफॉर्म में अनावश्यक परिवर्तन
हर वर्ष किसी न किसी कक्षा की यूनिफॉर्म में बदलाव किया जाता है, जिसका कोई ठोस कारण नहीं होता। इस पर भी प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।
🔹 निश्चित दुकानों से खरीदने का दबाव
कई स्कूलों का चुनिंदा दुकानों से अनुबंध होता है, जिससे अभिभावकों को वहीं से पुस्तकें, यूनिफॉर्म एवं अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। कुछ विद्यालय स्वयं ही सामग्री उपलब्ध कराकर मनमानी कीमत वसूलते हैं। ऐसी गतिविधियों पर निरंतर प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई।
🔹 फीस वसूली में मनमानी
शासन द्वारा फीस निर्धारण के स्पष्ट दिशा-निर्देश होने के बावजूद विभिन्न मदों के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूली जाती है।
🔹 पालक-शिक्षक संघ का औपचारिक गठन
प्रत्येक विद्यालय में पालक-शिक्षक संघ का गठन अनिवार्य है, परंतु अधिकांश संस्थाएं इसका पालन नहीं करतीं या केवल औपचारिकता निभाती हैं। इसके प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की गई।
