गेहूं और लहसुन की फसलें बर्बाद, मुआवजे की मांग
नामली (रतलाम): क्षेत्र में पिछले 24 घंटों के दौरान हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। पकने की कगार पर खड़ी गेहूं और लहसुन की फसलों को इस प्राकृतिक आपदा ने भारी नुकसान पहुँचाया है। खेतों में बिछी फसलें और जलभराव को देखकर किसानों की आँखों में आँसू हैं।
प्रमुख फसलें हुईं प्रभावित
क्षेत्र के कई गांवों में बारिश के साथ चली तेज हवाओं के कारण गेहूं की खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई है। वहीं, लहसुन की फसल, जो इस समय खुदाई के दौर में थी, पानी भरने के कारण खेतों में ही सड़ने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने खाद, बीज और सिंचाई में भारी पैसा निवेश किया था, लेकिन अब लागत निकालना भी मुश्किल लग रहा है।
किसानों की मांग: तुरंत हो सर्वे
नामली क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन और बीमा कंपनियों से तत्काल गिरदावरी (सर्वे) कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि:
- बीमा कंपनी के प्रतिनिधि खेतों में आकर वास्तविक नुकसान का आकलन करें।
- सरकार द्वारा राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC 6-4) के तहत उचित मुआवजा राशि जल्द से जल्द स्वीकृत की जाए।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावों का निपटारा बिना किसी जटिल प्रक्रिया के किया जाए।
72 घंटे की समय सीमा का रखें ध्यान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आपकी बीमित फसल का नुकसान हुआ है, तो इसकी सूचना 72 घंटे के भीतर संबंधित बीमा कंपनी, कृषि विभाग या टोल-फ्री नंबर पर देना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर बीमा क्लेम मिलने में समस्या आ सकती है।
किसानों का पक्ष: “हमने बड़ी उम्मीद से लहसुन और गेहूं बोया था, लेकिन इस बारिश ने सब कुछ तबाह कर दिया। अगर सरकार ने जल्द मदद नहीं की, तो हम कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे।” – स्थानीय किसान।
