रेल मंत्रालय ने “बेहतर ऑन-बोर्ड सेवाएँ” और “गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों तथा कार्गो-संबंधित सुविधाओं के माध्यम से रेल-आधारित लॉजिस्टिक्स” के साथ सुधार एक्सप्रेस को आगे बढ़ाया
केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज घोषणा की कि वर्ष 2026 के दौरान “52 सप्ताह में 52 सुधार” की योजना के अनुरूप भारतीय रेल द्वारा दो नए सुधारों को मंज़ूरी दी गई है और उनका कार्यान्वयन तुरंत शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुधार एक बार की घटना नहीं बल्कि एक सतत प्रक्रिया है।
श्री वैष्णव ने कहा कि इसका प्रभाव पहले से ही स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, क्योंकि भारतीय रेल अब विश्व की दूसरी सबसे बड़ी माल परिवहन सेवा बन चुकी है और पूरे तंत्र में नई पीढ़ी की ट्रेनों और आधुनिक कार्य पद्धतियों का विकास हो रहा है।
1) बेहतर ऑन-बोर्ड सेवाओं के लिए सुधार
रेल मंत्रालय ने 2026 से भारतीय रेल ट्रेनों, विशेषकर लंबी दूरी की ट्रेनों में पूरी तरह एंड-टू-एंड सफाई सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। पूर्व में सफाई मुख्यतः आरक्षित कोचों तक सीमित थी, लेकिन अब सामान्य (जनरल) कोचों में भी इसे प्रणालीगत रूप से लागू किया जाएगा।
रेल ट्रेनों की पूरक सफाई — जैसे शौचालय, कूड़ेदान, आंतरिक केबिन, जल सुविधाएँ आदि — को नियमित रूप से सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को बेहतर यात्रा वातावरण मिलेगा। वर्तमान यात्रा के दौरान छोटी-छोटी विद्युत या यांत्रिक त्रुटियों का भी निरंतर समाधान किया जाएगा।
इसके लिए सेवा प्रदाताओं की पहचान की जाएगी और एआई-सक्षम निगरानी (AI-based monitoring) की व्यवस्था की जाएगी ताकि उत्कृष्ट और सतत सफाई सुनिश्चित हो सके।
इस सुधार के पहले चरण में लगभग 80 ट्रेनों को चिन्हित किया गया है और इसे अगले तीन वर्षों में भारतीय रेल की सभी ट्रेनों में लागू करने का लक्ष्य है।
2) गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के लिए सुधार
दूसरे सुधार का संकल्प गतिशक्ति कार्गो टर्मिनलों को और अधिक सक्षम बनाना है। पहले से बनाए गए 124 मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनलों को “कार्गो-प्लस-प्रोसेसिंग हब” में परिवर्तित किया जाएगा। इससे लॉजिस्टिक्स का संचालन और भी अधिक प्रभावी और तेज़ होगा।
यह योजना 500 से अधिक गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों के विकास की भी दिशा में काम करेगी, जिसमें टर्मिनलों के भीतरी प्रसंस्करण सुविधाओं (जैसे सीमेंट पैकेजिंग, खाद्यान्न स्टफिंग-डी-स्टफिंग आदि) का समावेश भी होगा। इससे समय, लागत और संसाधनों की बचत में मदद मिलेगी।
साथ ही, टर्मिनलों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी और सामूहिक उपयोगकर्ता सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँगी जिससे विवादों और विलंबों को कम किया जा सके।
