शिक्षाविद् व समाजसेवी डॉ. भरत छापरवाल का निधन;

रतलाम, 15 फरवरी। देश के सुप्रसिद्ध चिकित्सक, शिक्षाविद् और समाज सेवा की मिसाल डॉ. भरत छापरवाल के निधन पर उनके परिवार ने नेत्रदान का संकल्प पूरा किया। उनके इस पुनीत कार्य से दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को नई रोशनी मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
डॉ. छापरवाल न केवल एक ख्यातनाम चिकित्सक थे, बल्कि वे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पूर्व अध्यक्ष और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के दो बार कुलपति (Vice Chancellor) भी रहे। वे मुरलीधर किशन गोपाल पारमार्थिक ट्रस्ट (MK इंटरनेशनल आई बैंक) के ट्रस्टी और ‘अभ्यास मंडल’ के सलाहकार भी थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. छापरवाल का जाना समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
सेवा और समर्पण का जीवन अंतिम संस्कार के पूर्व त्रिवेणी मुक्तिधाम, रतलाम में आयोजित शोक सभा में डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज के गोविंद काकानी ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. छापरवाल अत्यंत सहज, सरल और विद्वान व्यक्तित्व के धनी थे। उनके मार्गदर्शन में अनेक संस्थाओं ने प्रगति की और देश-विदेश के प्रतिष्ठित जर्नल्स में उनके 200 से अधिक रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए। रतलाम मेडिकल कॉलेज को भी सदैव उनका मार्गदर्शन मिलता रहा।
अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब उनकी अंतिम यात्रा में माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष शैलेंद्र डागा, IMA अध्यक्ष डॉ. चैतन्य खंडेलवाल, काटजू नगर विकास समिति, मानव सेवा समिति के पदाधिकारी, पूर्व मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. संजय दीक्षित सहित इंदौर आई बैंक के संचालक और बड़ी संख्या में चिकित्सक व गणमान्य नागरिक शामिल हुए। उनके सुपुत्र धीरज छापरवाल, सुपुत्री डॉ. मनीषा माहेश्वरी और दामाद डॉ. विपिन माहेश्वरी सहित नाथद्वारा से आए परिजनों ने उन्हें अश्रुपूरित विदाई दी।
रतलाम का 929वाँ नेत्रदान डॉ. भरत छापरवाल (पुत्र स्व. श्री चुन्नीलाल जी छापरवाल) का 15 फरवरी को निधन होने पर उनकी सुपुत्री डॉ. मनीषा माहेश्वरी ने नेत्रदान का संकल्प दोहराया। इसके क्रियान्वयन हेतु गीता भवन न्यास समिति के नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल और उनकी टीम (भगवान ढलवानी, मीनू माथुर, ओमप्रकाश अग्रवाल, सौरभ अग्रवाल, हेमंत मूणत और परमानंद पवार) ने सुबह 11:50 बजे नेत्र उत्सर्जन का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया। रतलाम में यह 929वाँ नेत्रदान दर्ज किया गया।
