अब विभाग नहीं, सीधे ट्रेजरी से होगा भुगतान; पारदर्शिता के लिए बड़ा फैसला
भोपाल | मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने मंत्रियों के यात्रा भत्ते (Traveling Allowance) के भुगतान की वर्षों पुरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब मंत्रियों के दौरों और यात्राओं का खर्च संबंधित विभाग के बजाय सीधे ट्रेजरी (खजाने) के माध्यम से किया जाएगा। वित्त विभाग ने इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
क्या है नया नियम?
अब तक की व्यवस्था के अनुसार, मंत्री जिस विभाग का कार्यभार संभालते थे, उनके यात्रा भत्तों का भुगतान उसी विभाग के बजट से किया जाता था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत:
- केंद्रीकृत भुगतान: अब सभी मंत्रियों के टीए बिल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रोसेस होंगे और भुगतान सीधे ट्रेजरी से होगा।
- सीधे खाते में ट्रांसफर: बिलों की जांच के बाद राशि सीधे मंत्री के बैंक खाते में जमा की जाएगी।
- बजट का बोझ कम: इस फैसले से विभागों के पास मौजूद उनके मूल बजट पर मंत्रियों के यात्रा खर्च का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
बदलाव की मुख्य वजह
सरकार के इस फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता (Transparency) और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना है:
- एक समान रिकॉर्ड: अब सरकार के पास एक ही जगह डेटा उपलब्ध रहेगा कि किस मंत्री ने कितनी यात्राएं कीं और उन पर कितना खर्च हुआ।
- भ्रष्टाचार पर रोक: सेंट्रलाइज्ड सिस्टम होने से बिलों के दोहराव या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
- पेपरलेस वर्क: फिजिकल फाइलों के चक्कर को खत्म कर पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस और तेज बनाया गया है।
विभागों और अफसरों को राहत
इस फैसले से न केवल मंत्रियों को बल्कि विभाग के अधिकारियों को भी राहत मिलेगी। अक्सर देखा जाता था कि बजट की कमी के कारण विभागों में मंत्रियों के टीए बिल लंबे समय तक लंबित रहते थे। अब ट्रेजरी से सीधा संबंध होने के कारण भुगतान समय पर हो सकेगा। साथ ही, मंत्रियों के स्टाफ और उनके साथ यात्रा करने वाले अधिकारियों के भत्तों को भी इसी डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा रहा है।
वित्त विभाग का निर्देश: विभाग ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने सॉफ्टवेयर को अपडेट करें और पुराने लंबित बिलों का जल्द से जल्द निपटारा कर नए सिस्टम को अपनाएं।
