महिदपुर रोड (सचिन भंडारी)। राष्ट्रसंत श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वर जी महाराजा समुदाय की साध्वी एवं पुण्यसम्राट गुरुदेव की पोत्री साध्वी श्री शाश्वतप्रिया श्री जी म.सा. आदि ठाणा-4 का बुधवार को नगर में भव्य एवं ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। सुबह रूपेटा गांव से विहार कर जैसे ही साध्वी श्री का आगमन नागदा चौराहा पर हुआ, पूरा वातावरण गुरुदेव के जयकारों और ढोल-नगाड़ों की थाप से भक्तिमय हो गया।
भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम
मंगल प्रवेश के उपलक्ष्य में एक विशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें समाजजन श्रद्धा और उत्साह के साथ शामिल हुए। नगर के प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा गहुली कर साध्वी श्री का भावभीना स्वागत किया गया और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। यह जुलूस नगर भ्रमण के पश्चात श्री राजेन्द्र सूरी ज्ञान मंदिर पहुँचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गया।
गुरु सान्निध्य ही भवसागर से पार होने का मार्ग: साध्वी श्री
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी श्री ने गुरु भक्ति की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
“जैसे लोहे की कील पानी में डूब जाती है, वैसे ही गुरु के बिना जीवन संसार की उलझनों में डूब जाता है। गुरु वह नौका हैं जो हमें इस भवसागर से पार लगाते हैं। वे हमें असत्य से सत्य और अज्ञान से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शक हैं।”
रतलाम चातुर्मास की विनती स्वीकार
विशेष रूप से, जैन श्री संघ के अध्यक्ष अजय चोरडिया द्वारा साध्वी श्री से नगर में पधारने और रतलाम चातुर्मास के संदर्भ में विनती की गई, जिसे साध्वी श्री ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। उनके प्रवास के दौरान नगर में कई आध्यात्मिक और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
विशेष सहभागिता
आज के इस प्रभावना और भक्तिपूर्ण कार्यक्रम का लाभ पीयूष कुमार-प्रकाशचंद चतर परिवार द्वारा लिया गया। इस अवसर पर सकल जैन श्री संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, नवयुवक, तरुण, महिला, बहु एवं बालिका परिषद के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी द्वारा दी गई।
