IAS संतोष वर्मा मामला : कार्रवाई का इंतज़ार जारी
भोपाल, मध्य प्रदेश — वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के विवादित बयानों और उनके खिलाफ जारी जांच-कार्रवाई को लेकर अहम developments सामने आए हैं। हालांकि राज्य सरकार ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए हैं, केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक अंतिम निर्णय नहीं आया है।
⚠️ विवाद का कारण
- 23 नवंबर 2025 को भोपाल में आयोजित AJAKS (अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ) के कार्यक्रम में वर्मा ने आरक्षण पर विवादित बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि “आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को नहीं देता या उससे रिश्ता नहीं बनाता।” यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और भारी आलोचना के बीच विवाद पैदा हो गया।
- इसके अलावा वह हाईकोर्ट और SC/ST वर्गों के न्यायिक नियुक्तियों पर भी आपत्ति जताते हुए टिप्पणी करते सुने गए, जिससे सामाजिक और राजनीतिक नाराज़गी बढ़ी।
🧑💼 राज्य सरकार की कार्रवाई
- मध्य प्रदेश सरकार ने वर्मा को उप सचिव (कृषि विभाग) के पद से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) में बिना किसी कार्य के तैनात कर दिया।
- सरकार ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), केंद्र सरकार को उनके बर्खास्तगी प्रस्ताव के साथ एक अनुशंसा भेजी थी, जिसमें कहा गया कि उनके द्वारा IAS में पदोन्नति जाली/फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई थी और कई आपराधिक मामलों का सामना करना रहा है।
- इसी मामले में एक चार्जशीट जारी करने की प्रक्रिया भी चल रही है और विभागीय जांच जारी है।
📍 केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया अभी तक नहीं
- राज्य सरकार ने 12 दिसंबर 2025 को केंद्र को बर्खास्तगी प्रस्ताव भेजा, लेकिन करीब दो महीने के बावजूद केंद्र की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है। जीएडी के अधिकारियों के अनुसार, प्रस्ताव पर अभी तक जवाब नहीं मिला है और संतोष वर्मा GAD पूल में ही तैनात हैं।
📌 विरोध और प्रतिक्रियाएँ
- विवादित बयान के बाद ब्राह्मण समुदाय और कई सामाजिक संगठनों ने कड़े विरोध और प्रदर्शन की धमकी दी है।
- विपक्षी नेताओं और वरिष्ठ नेताओं ने भी सरकार पर दबाव बनाया कि वर्मा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसे बयानों से सामाजिक सद्भाव को बनाए रखा जाए।
