जावरा में गुरु पूर्णिमा महोत्सव की सुराणा परिवार को मिली स्वीकृति पालीताणा में संपन्न हुआ आचार्य श्री का 53वां पाट महोत्सव जावरा (निप्र): जैनाचार्य एवं सत्य साधना प्रेरक श्रीपूज्य जिनचंद्र सूरी जी महाराज का 53वाँ पाट महोत्सव शाश्वत तीर्थ पालीताणा में रविवार को संपन्न हुआ। इस दो दिवसीय महोत्सव के प्रथम दिन गिरिराज यात्रा का आयोजन हुआ तथा संध्या में ‘अहं से सोहं’ विषय पर आधारित प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी नाट्य प्रस्तुति दी गई। भक्ति संध्या में प्रसिद्ध गीतकार पिंटू स्वामी और सिद्धार्थ डागा द्वारा प्रस्तुत भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। महोत्सव के दूसरे दिन का शुभारंभ चतुर्विध संघ के साथ जिनालय दर्शन से हुआ। भगवान महावीर जिनालय (नंदप्रभा) में चैत्यवंदन के पश्चात एक घंटे का सामूहिक सत्य साधना ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें नंदप्रभा परिसर ट्रस्ट के प्रमुख ट्रस्टी भी सम्मिलित हुए। इस अवसर पर महाराज श्री ने नंदप्रभा संग्रहालय का भी अवलोकन किया। भव्य वरघोड़ा और वंदना परमात्मा के रथ के साथ आयोजित भव्यातिभव्य वरघोड़े (जुलूस) में श्रीपूज्य जिनचंद्र सूरी जी, यतिवर्य श्री अमृत सुंदर जी, यति श्री सुमति सुंदर जी एवं आर्या समकित प्रभा श्री जी के सान्निध्य में देशभर से आए गुरु-भक्तों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। नगर भ्रमण के पश्चात वरघोड़ा शत्रुंजय तलेटी पहुँचा, जहाँ गुरुदेव की निश्रा में वंदना संपन्न हुई। पाट महोत्सव के अवसर पर गुरु पूजन एवं कांबली अर्पण का लाभ सूरत के श्री खेलनभाई सुरेशभाई वढारिया परिवार ने लिया। वहीं, जिनेश्वर युवक परिषद (बीकानेर) के 125 सदस्यीय संघ द्वारा गुरुदेव को अभिनंदन पत्र भेंट कर कांबली ओढ़ाई गई। जावरा में होगा गुरु पूर्णिमा महोत्सव मीडिया प्रभारी शिरीष सकलेचा ने बताया कि इस अवसर पर जावरा श्रीसंघ की ओर से आशीष एवं अभिनंदन सुराणा परिवार द्वारा गुरुदेव से जावरा में गुरु पूर्णिमा महोत्सव हेतु पधारने की भावपूर्ण विनंती की गई। इसे सहर्ष स्वीकार करते हुए गुरुदेव ने 29 जुलाई 2026 को जावरा में गुरु पूर्णिमा आयोजन की घोषणा की। इस महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में गुरुभक्त उपस्थित रहे। दस दिवसीय ध्यान शिविर प्रारंभ पालीताणा स्थित सौधर्म निवास परिसर में 2 फरवरी से दस दिवसीय सत्य साधना ध्यान शिविर प्रारंभ हो गया है। इसमें सैकड़ों साधक और साधिकाएँ सहभागी बनकर आत्मशुद्धि के अंतर-तप में लीन हो रहे हैं। श्रद्धा को केवल भावना तक सीमित न रखें: गुरुदेव इस अवसर पर जैनाचार्य श्री ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा—
”सिद्धाचल जैसी दिव्य साधना भूमि पर आकर दादा आदिनाथ के प्रति अगाध श्रद्धा एवं भक्ति का भाव जागृत होता है। किंतु यदि उस श्रद्धा को केवल भावना तक सीमित रखा जाए और जीवन में परिवर्तन की दिशा में कदम न बढ़ाए जाएँ, तो वह पुण्य के प्रवाह पर रोक लगाने जैसा होगा। सत्य साधना को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएँ, तभी जीवन खुशहाल होगा।”