रतलाम। भारतीय विवाह परंपरा में सात वचनों का महत्व सर्वोपरि है, लेकिन हाल ही में संपन्न हुए एक विवाह समारोह ने आधुनिकता और परंपरा के मेल की एक नई मिसाल पेश की है। विवाह की वेदी पर जब पंडित जी ने दूल्हा-दुल्हन को आठवां वचन दिलवाया, तो वहां मौजूद हर शख्स भावुक और गौरवान्वित हो उठा।
क्या था वह विशेष ‘आठवां वचन’?
आमतौर पर सात फेरों के साथ सात वचन पूरे होते हैं, लेकिन इस विवाह में विद्वान पंडित ने वर-वधू से एक विशेष संकल्प लिया। चूंकि यह जोड़ा विवाह के पश्चात अमेरिका (USA) में बसने जा रहा है, इसलिए उन्हें यह वचन दिलाया गया कि:
”सात समुंदर पार सात फेरों की मर्यादा को अक्षुण्ण रखेंगे और आधुनिकता की चकाचौंध के बीच भी अपनी ‘सनातन संस्कृति’ और ‘भारतीय परंपराओं’ का पालन पूरी निष्ठा से करेंगे।”
संस्कृति के प्रति अटूट समर्पण
विवाह के इस सुखद अवसर पर यह संकल्प चर्चा का विषय बना हुआ है। दूल्हा और दुल्हन दोनों ने सहर्ष इस आठवें वचन को स्वीकार किया और विश्वास दिलाया कि वे विदेश में रहकर भी अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे। यह पहल उन युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है जो उच्च शिक्षा या करियर के लिए विदेश जाते हैं, लेकिन अपनी मिट्टी और संस्कारों को पीछे छोड़ देते हैं।
परंपरा और आधुनिकता का संगम
यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि पश्चिमी सभ्यता के बीच भारतीय मूल्यों को जीवित रखने का एक संकल्प बन गया है। उपस्थित परिजनों और अतिथियों ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्कार ही हमारी असली पूंजी हैं।
