जनगणना 2027 के प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2026 तक मकानों की गणना की जाएगी
कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला जनगणना समन्वय समिति की बैठक आयोजित
रतलाम. कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में जिला जनगणना समन्वय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में अपर कलेक्टर डॉ. शालिनी श्रीवास्तव, पीओ डूडा श्री अरुण पाठक, आयुक्त नगर निगम श्री अनिल भाना, जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी बालकृष्ण पाटीदार, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी श्रेय भावसार, उपसंचालक जनसंपर्क श्रीमती अनुराधा गहरवाल, जिला जनगणना समन्वय समिति के सदस्य और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर ने बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक संख्या में कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाने और जनगणना निदेशालय (भारत सरकार) के निर्देशानुसार सभी तैयारियाँ पूर्ण करने के निर्देश दिए।
बैठक में जनगणना निदेशालय द्वारा नियुक्त प्रभारी अधिकारी सुश्री ओजस्विनी (सांख्यिकीय अन्वेषक ग्रेड-दो) ने बताया कि भारत की जनगणना-2027 दो चरणों में की जाएगी। प्रथम चरण 01 मई 2026 से 30 मई 2026 तक आयोजित होगा, जिसमें मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा, जिसमें वास्तविक जनसंख्या गणना होगी।
प्रथम चरण के दौरान प्रगणक (Enumerators) और पर्यवेक्षक (Supervisors) घर-घर दस्तक देकर मकान सूचीकरण का कार्य करेंगे। इस कार्य के लिए ‘स्व-गणना’ (Self-enumeration) का विकल्प 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक (प्रथम चरण से 15 दिन पूर्व) उपलब्ध रहेगा। मकान सूचीकरण के दौरान शासन द्वारा अधिसूचित 33 प्रश्न पूछे जाएंगे।
दूसरे चरण में जनसंख्या गणना के दौरान प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी एकत्रित की जाएगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक क्रियाकलाप, प्रवास और प्रजननता विवरण जैसे बिंदु शामिल होंगे।
जनगणना 2027 देश की प्रथम डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें ‘एच.एल.ओ. एप्लीकेशन’ के माध्यम से आँकड़ों का संकलन किया जाएगा। पूरे कार्य की रियल-टाइम मॉनिटरिंग ‘सेन्सस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ (CMMS) पोर्टल के माध्यम से होगी। इसके अतिरिक्त, निवासियों के लिए अपना डेटा स्वयं ऑनलाइन भरने हेतु एक ‘स्व-गणना वेब पोर्टल’ भी विकसित किया जाएगा।
जनगणना से संबंधित समस्त गतिविधियाँ जनगणना अधिनियम 1948 एवं जनगणना नियम 1990 के प्रावधानों के तहत संचालित की जाती हैं। एकत्रित की गई व्यक्तिगत जानकारी पूर्णतः गोपनीय रहती है और इसे किसी भी साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि जनगणना के नाम पर किसी भी व्यक्ति से OTP या बैंक विवरण नहीं माँगा जाएगा। इस कार्य हेतु मास्टर ट्रेनर्स द्वारा फील्ड ट्रेनर्स को और उनके द्वारा प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्य में सम्मिलित कर्मचारियों को शासन द्वारा मानदेय भी दिया जाएगा।
