हिंदू धर्म और तंत्र शास्त्र में दस महाविद्याओं का विशेष स्थान है। इन्हीं में से आठवीं महाविद्या माँ बगलामुखी हैं। इन्हें ‘पीतांबरा’ (पीला वस्त्र धारण करने वाली) और ‘ब्रह्मास्त्र विद्या’ के नाम से भी जाना जाता है। माँ बगलामुखी की साधना शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, मुकदमों में सफलता और जीवन की समस्त बाधाओं को जड़ से मिटाने के लिए अचूक मानी जाती है।
1. उत्पत्ति की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सत्ययुग में एक बार भीषण ब्रह्मांडीय तूफान आया। इस तूफान के कारण चराचर जगत का विनाश होने लगा। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर सौराष्ट्र (गुजरात) के ‘हरिद्रा सरोवर’ (हल्दी की झील) से माँ बगलामुखी प्रकट हुईं। उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति से उस विनाशकारी तूफान को थाम लिया (स्तंभित कर दिया) और सृष्टि की रक्षा की।
2. माँ का स्वरूप और प्रतीकवाद
माँ बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और स्वर्ण के समान आभा वाला है:
- पीला रंग: माँ को पीला रंग प्रिय है, जो सूर्य के प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक है।
- जिह्वा पकड़ना: माँ के एक हाथ में गदा है और दूसरे हाथ से वे शत्रु की जीभ पकड़े हुए हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि वे भक्त के विरुद्ध बोलने वाले षड्यंत्रकारियों की वाणी और बुद्धि को मौन कर देती हैं।
- स्तंभन शक्ति: माँ बगलामुखी ‘स्तंभन’ की देवी हैं। वे न केवल बाहरी शत्रुओं को, बल्कि व्यक्ति के भीतर के क्रोध और लोभ जैसे विकारों को भी स्थिर करने की क्षमता रखती हैं।
3. साधना का महत्व और लाभ
- कानूनी मामलों में विजय: कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता के लिए माँ की कृपा अनिवार्य मानी जाती है।
- शत्रु बाधा से मुक्ति: ज्ञात और अज्ञात शत्रुओं के षड्यंत्रों को विफल करने के लिए।
- वाक-सिद्धि: वाद-विवाद और भाषण कला में निपुणता प्राप्त करने के लिए।
- सुरक्षा कवच: नकारात्मक शक्तियों और तंत्र-बाधा से बचाव के लिए।
4. शक्तिशाली मंत्र (Mantras)
साधना के दौरान इन मंत्रों का जाप हल्दी की माला से करना चाहिए:
- मूल मंत्र:“ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः”
- ब्रह्मास्त्र मंत्र (सर्व कार्य सिद्धि):“ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्व्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ।”
5. संक्षिप्त पूजा विधि
- वस्त्र: पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- आसन व दिशा: पीले आसन पर बैठें और मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
- पूजन: माँ की मूर्ति या यंत्र पर हल्दी, पीले फूल और पीला चंदन अर्पित करें।
- दीप: घी में चुटकी भर हल्दी डालकर दीपक जलाएं।
- जप: हल्दी की माला से कम से कम 108 बार मंत्र का जाप करें।
6. माँ बगलामुखी की आरती
जय बगलामुखी माता, मैया जय बगलामुखी माता। अपने भक्त जनों की, बगला, हर लेती बाधा ॥ जय बगलामुखी माता…
पीताम्बर सजि सोहे, स्वर्ण आभा न्यारी। हल्दी की माला गल, शोभा अति भारी ॥ जय बगलामुखी माता…
गदा हस्त में सोहे, शत्रु जीभ को पकड़े। दुष्ट बुद्धि का नाश करो, मोह के बंधन जकड़े ॥ जय बगलामुखी माता…
स्तम्भन शक्ति तुम्हारी, जग में है जानी। ब्रह्मास्त्र विद्या तुम, वेदों की वाणी ॥ जय बगलामुखी माता…
विष्णु की तुम शक्ति, संकट हरने वाली। भक्तों की रक्षा करती, माँ तुम बलशाली ॥ जय बगलामुखी माता…
पीले पुष्प चढ़ाऊँ, और चढाऊँ मेवा। नित उठ ध्यान धरूँ माँ, करूँ तुम्हारी सेवा ॥ जय बगलामुखी माता…
बगलामुखी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत ‘नंद’ भाग्य जगे, वांछित फल पावे ॥ जय बगलामुखी माता…
7. विशेष सावधानी (Note)
माँ बगलामुखी की साधना उग्र मानी जाती है। सामान्य भक्ति और आरती कोई भी कर सकता है, लेकिन किसी विशेष तांत्रिक अनुष्ठान के लिए योग्य गुरु का मार्गदर्शन लेना अनिवार्य है। साधना के दौरान ब्रह्मचर्य और सात्विक आहार का पालन करें।
