
सागर: मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व ‘वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व’ (VDTR) में जल्द ही एक नया मेहमान दस्तक देने वाला है। कान्हा टाइगर रिजर्व के बाड़े में जंगल की दुनिया के नियम सीखने वाला एक तीन वर्षीय युवा टाइगर अब सागर-दमोह के जंगलों में दहाड़ेगा। वन विभाग मुख्यालय ने इस टाइगर को शिफ्ट करने की आधिकारिक अनुमति दे दी है।
मां से बिछड़ने से ‘दबंग’ बनने तक का सफर
इस टाइगर की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। महज 4 महीने की उम्र में यह शावक पेंच टाइगर रिजर्व में अपनी मां से बिछड़ गया था। अकेले जंगल में जीवित रहना नामुमकिन था, इसलिए इसे कान्हा टाइगर रिजर्व के विशेष बाड़े में लाया गया।
- ट्रेनिंग: बाड़े में इसे ‘इन्-सिटू’ (In-situ) पद्धति से शिकार करना और जंगल में सर्वाइव करने के गुर सिखाए गए।
- अब हुआ तैयार: तीन साल की उम्र पूरी करने के बाद यह टाइगर अब पूरी तरह आत्मनिर्भर और वयस्क हो चुका है, जिसे अब खुले जंगल में छोड़ने का समय आ गया है।
कब होगी नए मेहमान की एंट्री?
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शिफ्टिंग की तैयारी अंतिम चरण में है।
- संभावित समय: इस टाइगर को जनवरी के आखिरी सप्ताह या फरवरी के पहले हफ्ते में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा।
- वर्तमान स्थिति: वीडीटीआर (नौरादेही और रानी दुर्गावती अभयारण्य का संयुक्त क्षेत्र) में वर्तमान में करीब 26 टाइगर मौजूद हैं। इस नए टाइगर के आने से यहाँ कुनबा और भी मजबूत होगा।
क्यों खास है वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व?
नौरादेही और रानी दुर्गावती को मिलाकर बनाया गया यह टाइगर रिजर्व क्षेत्रफल के लिहाज से मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यहाँ की भौगोलिक स्थिति बाघों के लिए बेहद अनुकूल है। नए टाइगर की शिफ्टिंग से यहाँ जेनेटिक विविधता (Genetic Diversity) बढ़ेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य बिंदु:
- उम्र: 3 वर्ष।
- सफर: पेंच (जन्म) ➔ कान्हा (ट्रेनिंग) ➔ वीडीटीआर (नया घर)।
- उद्देश्य: टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या और जेनेटिक विविधता बढ़ाना
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (VDTR): एक नज़र में
| विशेषता | विवरण |
| कुल क्षेत्रफल | लगभग 2,339 वर्ग किमी (MP का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व) |
| किन जिलों में फैला है | सागर, दमोह और नरसिंहपुर |
| वर्तमान बाघों की संख्या | 26 (नया मेहमान आने के बाद 27) |
| प्रमुख जीव | बाघ, तेंदुआ, नीलगाय, चिंकारा और बारहसिंगा |
| खासियत | नौरादेही और रानी दुर्गावती अभयारण्यों को जोड़कर बनाया गया |
टाइगर की शिफ्टिंग से जुड़ी 5 बड़ी बातें:
- अनाथ से ‘किंग’ बनने का सफर: पेंच के जंगलों में अनाथ हुए इस शावक को इंसानी दखल से दूर रखकर प्राकृतिक तरीके से पालना वन विभाग की बड़ी जीत है।
- सॉफ्ट रिलीज की तैयारी: शुरुआत में टाइगर को सीधे जंगल में छोड़ने के बजाय एक सुरक्षित बाड़े (Enclosure) में रखा जा सकता है, ताकि वह नए माहौल में ढल सके।
- पर्यटन को बढ़ावा: नए और युवा टाइगर के आने से वीडीटीआर में ‘टाइगर साइटिंग’ की संभावना बढ़ेगी, जिससे सागर और दमोह में पर्यटन को नई ऊर्जा मिलेगी।
- इको-सिस्टम का संतुलन: नया नर टाइगर आने से रिजर्व में जेनेटिक डायवर्सिटी बेहतर होगी, जो भविष्य में बाघों की स्वस्थ आबादी के लिए ज़रूरी है।
- सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: वीडीटीआर प्रबंधन ने नए मेहमान की निगरानी के लिए रेडियो कॉलर और विशेष ट्रैकिंग टीमों को अलर्ट पर रखा है।
