नई दिल्ली | राज्य ब्यूरो: दिल्ली की सियासत में एक बार फिर गरमाहट बढ़ गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। भाजपा विधायकों ने इस संबंध में राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपा है।
विजेंद्र गुप्ता ने प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल सरकार को घेरते हुए कहा कि पिछले पांच महीनों से दिल्ली में शासन पूरी तरह ठप पड़ा है। उन्होंने सरकार से कई तीखे सवाल पूछे हैं:
1. जेल से सरकार और कैबिनेट पर सवाल
भाजपा नेता ने पूछा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जेल में होने के कारण पिछले 5 महीनों से न तो कैबिनेट की कोई बैठक हुई है और न ही कोई बड़ा विधायी कार्य हुआ है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जेल से मुख्यमंत्री ने अब तक कितने और क्या निर्णय लिए हैं?
2. संवैधानिक संस्थाओं की अनदेखी
विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ‘राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण’ के अध्यक्ष हैं, लेकिन बैठकें न होने से प्रशासनिक कार्य बाधित हैं। साथ ही, छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन न करना संविधान का सीधा उल्लंघन है।
3. दिल्ली जल बोर्ड में 73 हजार करोड़ का ‘लोन’ विवाद
भाजपा ने जल बोर्ड में वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने इसे सदन में पेश नहीं किया। जल बोर्ड ने दिल्ली सरकार का 73 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लौटाने से इनकार कर दिया है, जिस पर सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
4. शिक्षा और स्वास्थ्य पर ‘श्वेत पत्र’ की मांग
विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार के प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर सवाल उठाते हुए निम्नलिखित मांगों को सामने रखा:
- शिक्षा: दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विकास विश्वविद्यालय, शिक्षक विश्वविद्यालय और खेल विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति पर ‘श्वेत पत्र’ (White Paper) जारी किया जाए।
- स्वास्थ्य: 7 नए आईसीयू अस्पतालों और पॉलीक्लिनिक के निर्माण में देरी और उनकी बढ़ती लागत का कारण बताया जाए।
5. जनहित योजनाओं में रुकावट
विजेंद्र गुप्ता ने केंद्र की ‘आयुष्मान भारत योजना’ को दिल्ली में लागू न करने और दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित 12 कॉलेजों को फंड न देने का मुद्दा भी उठाया। साथ ही ‘जहां झुग्गी वहीं मकान’ योजना की धीमी गति पर विवरण मांगा।
निष्कर्ष: दिल्ली में बढ़ता प्रशासनिक संकट?
विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि कैग (CAG) की 11 रिपोर्ट पिछले सात वर्षों से दबा कर रखी गई हैं। भाजपा का दावा है कि नगर निगम में स्थायी समिति का गठन न होने से दिल्ली की वित्तीय स्थिति खराब हो रही है। अब देखना यह है कि क्या उपराज्यपाल या सरकार विपक्ष की इस मांग पर कोई संज्ञान लेते हैं।
