भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) संपन्न: भारत की वैश्विक व्यापार सहभागिता में एक रणनीतिक उपलब्धि
16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष महामहिम सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा ऐतिहासिक घोषणा।
मुख्य आकर्षण:
- मजबूत साझेदारी: विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (भारत) और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (यूरोपीय संघ – जो वैश्विक जीडीपी का 25% है) के बीच विश्वसनीय आर्थिक संबंधों का निर्माण।
- अभूतपूर्व बाज़ार पहुँच: भारत के 99% से अधिक निर्यात को यूरोपीय संघ में वरीयतापूर्ण (Preferential) प्रवेश, जिससे व्यापक विकास की संभावनाएँ खुलेंगी।
- रोजगार सृजन: एमएसएमई, महिलाओं, कारीगरों, युवाओं एवं पेशेवरों के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त।
- निर्यात को गति: ₹6.41 लाख करोड़ (75 अरब अमेरिकी डॉलर) के निर्यात को बल; वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लगभग 33 अरब डॉलर के निर्यात को विशेष लाभ।
- मेक इन इंडिया: संतुलित एवं चरणबद्ध ऑटो उदारीकरण से घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन।
- कृषि संरक्षण: कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात के लिए अनुकूल पहुँच, जबकि डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित (कोई मार्केट एक्सेस नहीं)।
- सेवा क्षेत्र: आईटी और कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार; 144 उप-क्षेत्रों में भारतीय सेवा प्रदाताओं को आसान पहुँच।
- संवाद और सहयोग: सीबीएएम (CBAM) प्रावधानों पर रचनात्मक चर्चा और सहयोग सुनिश्चित।
विस्तृत विवरण
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष महामहिम सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने आज 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के अवसर पर भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India–EU FTA) के संपन्न होने की संयुक्त घोषणा की। यह मील का पत्थर भारत के प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ को खुले बाज़ार, पारदर्शिता और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्ध विश्वसनीय साझेदारों के रूप में स्थापित करता है। वर्ष 2022 में वार्ता पुनः शुरू होने के बाद, गहन चर्चाओं के परिणामस्वरूप यह ‘संतुलित और नियम-आधारित’ आर्थिक साझेदारी सुनिश्चित हुई है।
व्यापारिक आंकड़े (2024–25):
| श्रेणी | मूल्य (₹ में) | मूल्य (USD में) |
| कुल द्विपक्षीय वस्तु व्यापार | ₹11.5 लाख करोड़ | 136.54 अरब डॉलर |
| भारत का निर्यात | ₹6.4 लाख करोड़ | 75.85 अरब डॉलर |
| भारत का आयात | ₹5.1 लाख करोड़ | 60.68 अरब डॉलर |
| सेवाओं का व्यापार (2024) | ₹7.2 लाख करोड़ | 83.10 अरब डॉलर |
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता “विकसित भारत” के लक्ष्य की ओर एक निर्णायक कदम है। इससे न केवल “मेक इन इंडिया” को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारतीय उत्पादों को यूरोप के विशाल बाजारों में शून्य शुल्क पर पहुँच प्राप्त होगी।
प्रमुख क्षेत्र और लाभ:
- श्रम-प्रधान क्षेत्र: वस्त्र, जूते, हस्तशिल्प और इंजीनियरिंग वस्तुओं पर लगने वाले 10% तक के आयात शुल्क अब समाप्त हो जाएंगे।
- ऑटोमोबाइल: चरणबद्ध कोटा प्रणाली से भारतीय उपभोक्ताओं को उन्नत यूरोपीय तकनीक मिलेगी और घरेलू उद्योग को प्रतिस्पर्धा का लाभ होगा।
- कृषि: चाय, कॉफी और मसालों को बढ़त मिलेगी, जबकि डेयरी और पोल्ट्री जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को आयात से सुरक्षित रखा गया है।
- पेशावर गतिशीलता: भारतीय आईटी पेशेवरों, छात्रों और पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञों (आयुष आदि) के लिए वीजा और वर्क परमिट की प्रक्रिया सुगम होगी।
- बौद्धिक संपदा: पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) को मान्यता दी गई है, जो भारत की विरासत की रक्षा करेगी।
भविष्य की राह
यह भारत की 22वीं एफटीए साझेदारी है, जो मॉरीशस, यूएई, और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ हुए हालिया समझौतों की कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण है। यह समझौता “विकसित भारत 2047” के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत को एक विश्वसनीय, गतिशील और भविष्य-उन्मुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करता है।
